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Chaturshashti Bhairava Namavali 🌸 64 Bhairava Forms Explained with Hindi Shlokas & Word-to-Word Meaning

Chaturshashti Bhairava Namavali 🌸: 64 Divine Forms of Lord Bhairava with Hindi Shlokas & Word-to-Word Meaning(Representing AI image) 🌺 चतुःषष्टिभैरवनामावलिः 🌺 १।  असिताङ्गो विशालाक्षो मार्तण्डो मोदकप्रियः । स्वच्छन्दो विघ्नसन्तुष्टः खेचरः सचराचरः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): असिताङ्गः → काला शरीर वाला विशालाक्षः → बड़े नेत्र वाला मार्तण्डः → सूर्य सदृश मोदकप्रियः → मोदक (मिठाई) को प्रिय करने वाला स्वच्छन्दः → स्वतंत्र विघ्नसन्तुष्टः → विघ्नों से संतुष्ट खेचरः → आकाश में विचरने वाला (वायुचर) सचराचरः → चलने-फिरने वाले और स्थिर सभी में विद्यमान व्याख्या 🌸: यह भैरव रूप का वर्णन है, जो सब जगह मौजूद, स्वतंत्र, और हर जीव और पदार्थ में व्याप्त है। २। रुरुश्च क्रोड-दंष्ट्रश्च तथैव च जटाधरः । विश्वरूपो विरूपाक्षो नानारूपधरः परः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): रुरुः → भयंकर रुद्र क्रोड-दंष्ट्रः → क्रोधी और दंतयुक्त जटाधरः → जटाओं वाला विश्वरूपः → विश्व के स्वरूप वाला विरूपाक्षः → अजीब और भयंकर नेत्र वाला नानारूपधरः → अनेक रूप धारण करने वाला परः → परम व्याख्या 🌸: यह भैर...

Chaturshashti Bhairava Namavali 🌸 64 Bhairava Forms Explained with Hindi Shlokas & Word-to-Word Meaning

🌺 चतुःषष्टिभैरवनामावलिः 🌺 🌺 चतुःषष्टिभैरवनामावलिः 🌺 १। असिताङ्गो विशालाक्षो मार्तण्डो मोदकप्रियः । स्वच्छन्दो विघ्नसन्तुष्टः खेचरः सचराचरः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): असिताङ्गः → काला शरीर वाला विशालाक्षः → बड़े नेत्र वाला मार्तण्डः → सूर्य सदृश मोदकप्रियः → मोदक (मिठाई) को प्रिय करने वाला स्वच्छन्दः → स्वतंत्र विघ्नसन्तुष्टः → विघ्नों से संतुष्ट खेचरः → आकाश में विचरने वाला (वायुचर) सचराचरः → चलने-फिरने वाले और स्थिर सभी में विद्यमान व्याख्या 🌸: यह भैरव रूप का वर्णन है, जो सब जगह मौजूद, स्वतंत्र, और हर जीव और पदार्थ में व्याप्त है। २। रुरुश्च क्रोड-दंष्ट्रश्च तथैव च जटाधरः । विश्वरूपो विरूपाक्षो नानारूपधरः परः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): रुरुः → भयंकर रुद्र क्रोड-दंष्ट्रः → क्रोधी और दंतयुक्त जटाधरः → जट...
त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् — पूर्ण पूजा विधि 🌺 श्री त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् — सम्पूर्ण शास्त्रीय पूजा-विधि 🌺 ❁ ❀ ✿ ❀ ❁ १. पूर्व तैयारी (पूर्वाङ्ग) ✦✦✦ स्थान – पूर्व / उत्तर मुख आसन – लाल वस्त्र या आसन समर्पण – “ममोपात्त-समस्त-दुर्मित्क्षयद्वारा…” सामग्री : कुंकुम, अक्षत, पुष्प, पंचामृत, घृतदीप, कलश, नैवेद्य, ललिता-यंत्र। २. पवित्रीकरणम् “ॐ अपवित्रः पवित्रो वा…” जल सिर और शरीर पर छिड़कें — आत्मशुद्धि। ३. आचमनम् ॐ केशवाय नमः । ॐ नारायणाय नमः । ॐ माधवाय नमः । ४. संकल्प “ममोपात्त-सर्व-दुरितक्षयद्वारा श्री त्रिपुरसुन्दरी-अष्टक-पाठेन त्रिपुरसुन्दरी प्रीत्यर्थं करिष्ये।” ५. भू-शुद्धि / आसन-शुद्धि “ॐ हृं क्लीं अमृतं कुर्व स्वाहा” ६. प्राणायाम विनियोग ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः पूरक: ॐ ऐं कुम्भक: ह्रीं श्रीं क्लीं रेचक: सौः ७. रक्षा-विधानम् “ॐ अस्त्राय फट्” ८. कलश-स्थापन “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः” ९. अङ्ग-न्यास ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः हृदये नमः ॐ सौः शिरसि स्वाहा ॐ ह्रीं शिखायै वषट् ॐ श्रीं कवचाय ...

Parvati Vallabh Ashtak: Devotional Neelkanth Stava of Lord Shiva

  Lord Shiva in Neelkanth form meditating atop Mount Kailash, inspiring devotion through Parvati Vallabh Ashtak(Representing AI image) 🌸 श्रीमच्छंकरयोगींद्र विरचितं पार्वतीवल्लभाष्टकं नाम नीलकंठ स्तवः 🌸 १. श्लोक नमो भूतनाथं नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्। नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥१॥ शब्द-शब्द अनुवाद: नमो → प्रणाम भूतनाथं → सभी प्राणियों के स्वामी देवदेवं → परम देवता कालकालं → समय और मृत्यु के प्रभु दिव्यतेजम् → दिव्य तेज के स्वामी कामभस्मं → कामासुर नाशक शान्तशीलं → शांत और सदाचारी भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ ✨ सार: शिव के विभिन्न रूपों और गुणों को सम्मानित किया गया है। २. श्लोक सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम्। सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥२॥ शब्द-शब्द अनुवाद: सदा तीर्थसिद्धं → हमेशा तीर्थों में सिद्धि देने वाले सदा भक्तरक्षं → हमेशा भक्तों की रक्षा करने वाले सदा शैवपूज्यं → हमेशा शैवों द्वारा पूज्य सदा शु...

Parvati Vallabh Ashtak: Devotional Neelkanth Stava of Lord Shiva

पार्वतीवल्लभाष्टकं - नीलकण्ठ स्तवः 🌸 पार्वतीवल्लभाष्टकं - नीलकण्ठ स्तवः 🌸 श्लोक 1 नमो भूतनाथं नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्। नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥१॥ 🌸 नमो → प्रणाम 🌸 भूतनाथं → सभी प्राणियों के स्वामी 🌸 देवदेवं → परम देवता 🌸 कालकालं → समय और मृत्यु के प्रभु 🌸 दिव्यतेजम् → दिव्य तेज के स्वामी 🌸 कामभस्मं → कामासुर नाशक 🌸 शान्तशीलं → शांत और सदाचारी 🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ ✨ सार: शिव के विभिन्न रूपों और गुणों को सम्मानित किया गया है। श्लोक 2 सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम्। सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥२॥ 🌸 सदा तीर्थसिद्धं → हमेशा तीर्थों में सिद्धि देने वाले 🌸 सदा भक्तरक्षं → हमेशा भक्तों की रक्षा करने वाले 🌸 सदा शैवपूज्यं → हमेशा शैवों द्वारा पूज्य 🌸 सदा शुभ्रभस्मम् → सफेद भस्म धारण करने वाले 🌸 ...
श्रीमंगलागौरी स्तोत्र 🌸 श्रीमंगलागौरी स्तोत्र 🌸 रविरूवाच सूर्य देव कहते हैं, हे भव्य देवी, आपकी महिमा अपरम्पार है। देवि त्वदीयचरणाम्बुजरेणुगौरीं भालस्थल वहति प्रणतिप्रवीणः हे देवी, जो भक्त आपके चरणों के कण को अपने माथे पर रखते हैं, वे आपके प्रति पूर्ण निष्ठा में हैं। जन्मान्तरेऽपि रजनीकरचारुलेखा तां गौरयत्यतितरां किल तस्य पुंसः जन्म-जन्मांतर में भी, जो पुरुष रात के अंधकार में आपकी सुंदर रेखाओं वाली पूजा करता है, वह अत्यंत पुण्यवान है। श्रीमङ्गले सकलमङ्गलजन्मभूमे ... हरति पातककूलवृक्षान् हे मङ्गल गaurि, आप सम्पूर्ण जन्मभूमि में मंगलमय हैं, सभी पाप और दैत्य रूपी बाधाओं को नष्ट करती हैं, सम्पूर्ण संसार की पालनकर्ता हैं और जिनका नाम लिया जाता है, उनके पाप दूर होते हैं। मातर्भवानि भवती... न परिमुञ्चति तस्य गेहम् हे माता, जो आपकी शरण में आते हैं, उनके दुख नष्ट होते हैं। आपके नाम का स्मरण करने से जीवन प्रकाशमान और...

Mahakali Stuti – Powerful Sanskrit Hymn to Goddess Kali

  🌺 ॥ श्रीमहाकालीस्तुतिः ॥ 🌺 शब्दशः हिन्दी अनुवाद व भावार्थ सहित (हर श्लोक के साथ अर्थ को पुष्पों-सा सुगंधित रूप में प्रस्तुत किया गया है 🌸) १. ॐ नमः कालीकायै। 👉 ॐ – परमात्मा का पवित्र नाम 👉 नमः – नमस्कार, वंदन 👉 कालीकायै – देवी काली को भावार्थ 🌷: हे माँ काली! आपको शत-शत नमस्कार 🙏। आप काल की अधिष्ठात्री, भय का नाश करने वाली, परम शक्ति हैं। जयत्वद्याऽखिलं विश्वं काली कालानुशासिनी। 👉 जयतु – विजयी हो 👉 अद्य – आज 👉 अखिलं विश्वं – समस्त संसार 👉 काली – माँ काली 👉 कालानुशासिनी – समय को नियंत्रित करने वाली भावार्थ 🌹: आज सम्पूर्ण जगत पर जय हो उस काली की, जो स्वयं काल को भी संचालित करती हैं ⏳🌺। नमामि तां महादेवीं महाकालप्रियां शुभाम्॥ १॥ 👉 नमामि – मैं प्रणाम करता हूँ 👉 ताम् – उस देवी को 👉 महादेवीं – महान देवी 👉 महाकालप्रियां – महाकाल (शिव) की प्रिय 👉 शुभाम् – शुभ देने वाली भावार्थ 🌼: मैं उस महान, कल्याणकारी, महाकाल की प्रिया देवी को प्रणाम करता हूँ 🙏। जो समस्त विश्व में मंगल ही मंगल करती हैं 🌺। २. खड्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं...

Mahakali Stuti – Powerful Sanskrit Hymn to Goddess Kali

॥ श्रीमहाकालीस्तुतिः ॥ हिंदी अनुवाद व भावार्थ सहित 🌺 ॥ श्रीमहाकालीस्तुतिः ॥ 🌺 ॐ नमः कालीकायै। 🌸 शब्दार्थ: ॐ – परमात्मा का नाम, नमः – नमस्कार, कालीकायै – देवी काली को। भावार्थ: हे माँ काली! आपको शत-शत नमस्कार 🙏। आप काल की अधिष्ठात्री, भय का नाश करने वाली, परम शक्ति हैं। श्लोक १ जयत्वद्याऽखिलं विश्वं काली कालानुशासिनी। नमामि तां महादेवीं महाकालप्रियां शुभाम्॥ 🌸 अर्थ: आज सम्पूर्ण जगत पर जय हो उस काली की, जो स्वयं काल को भी संचालित करती हैं। मैं उस शुभ, महाकाल की प्रिया, महान देवी को प्रणाम करता हूँ। श्लोक २ खड्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं कपालं च वरप्रदाम्। सिंहारूढां महाभीमां महाकाल्यै नमोऽस्तु ते॥ 🌷 माँ के हाथों में खड्ग, त्रिशूल, खट्वांग और कपाल हैं। वो सिंहवाहिनी, भयंकर रूप धारण करने वाली और भक्तों को वरदान देने वाली हैं। श्लोक ३ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ 🌺 जो देवी सब प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं, उन्हीं को बारंबार नमस्कार 🙏। श्लोक ४ स्मरन्ति ये त्वां भक्त्या न...
श्री यमुनाष्टकम् - आदि शंकराचार्य 🌸 श्री यमुनाष्टकम् 🌸 आदि शंकराचार्य कृतम् श्लोक १ मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी । तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी ॥ मनोऽनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा । धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥१॥ अर्थ: हे यमुनाजी! आप श्रीकृष्ण की श्याम देह की शोभा हैं, तीनों लोकों के दुःखों को हरनेवाली हैं। आपके तट के कुंज मन को प्रसन्न करते हैं। हे कलिन्दनन्दिनी! सदा मेरे मन का मल धो दीजिए। 🌼 श्लोक २ मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता । भृशं प्रपातकप्रवञ्चनातिपण्डितानिशम् । सुनन्दनन्दनाङ्गसङ्गरागरञ्जिता हिता । धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥२॥ आपका जल अमृत समान है, श्रीकृष्ण के अंगराग से रँगा हुआ, पाप हरनेवाला और कल्याणकारी है। माँ, मेरे मन का कलुष धो डालिए। 🌷 श्लोक ३ लसत्तरङ्गसङ्गधूतभूतजातपातका । नवीनमाधुरीधुरीणभक्तिजातचातका । तटान्तवासदासहंससंसृता हि कामदा । धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥३॥ आपकी लहरें जन्म-जन्म के पाप धो डालती हैं, भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। माँ, मेरे मन का मल मिटाइए। 🌸 श्लोक ४ विहारर...
🌺 स्कन्द स्तोत्रम् 🌺 🌸 श्री स्कन्द स्तोत्रम् 🌸 🙏 श्री गणेशाय नमः 🙏 श्रीस्कन्द उवाच — यो मां शरणमापन्नं सर्वभूतहिते रतम् । अघं हन्ति न संदेहस्तस्मै स्कन्दाय ते नमः ॥ १ ॥ जो भगवान स्कन्द की शरण में आता है और सबका हित चाहता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। 🌺 सुरसेनार्यसेनानां सेनानायकतां गतम् । देवानामपि सर्वेषां त्रातारं प्रणमाम्यहम् ॥ २ ॥ देवताओं की सेना के सेनानायक और सब देवों के रक्षक स्कन्द को मैं नमस्कार करता हूँ। 🌼 गङ्गासुतं गुहं देवं मयूरस्थं महाबलम् । शक्तिहस्तं कवच्छत्रं प्रणमामि सनातनम् ॥ ३ ॥ गंगा के पुत्र, मोर पर विराजमान, शक्ति धारण करने वाले सनातन देव को मैं प्रणाम करता हूँ। 🌸 शरजं शक्तिहस्तं च कुण्डलोज्ज्वलकारिणम् । वज्रपाणिं महावीर्यं प्रणमामि शिखिध्वजम् ॥ ४ ॥ भाला धारण करने वाले, कुण्डलों से शोभित, वीर स्कन्द देव को प्रणाम। 🌺 तारकासुरसंहर्तारं सुरसेनसमन्वितम् । देवसेनापतिं देवं स्कन्दं प्रणम्य पार्वतम् ॥ ५ ॥ तारकासुर वध करने वाले, देवसेना के पति, पार्वती के पुत्र स्कन्द को नमस्कार। 🌼 क...

श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र

  🌸🌺🌼 ॐ श्रीं महाशूलिन्यै नमः 🌼🌺🌸 अब हम इस सम्पूर्ण श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र का शब्दशः हिन्दी अनुवाद और अर्थ-भावार्थ सहित व्याख्या करेंगे। (🙏 🌷) 🌹 मन्त्र प्रारम्भ 🌹 ॐ अस्य श्री शूलिनीदुर्गा माला मन्त्रस्य । 👉 इस श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र का (विषय) है — ब्रह्मा ऋषिः । 👉 इस मन्त्र के ऋषि (जिन्होंने इसका आविष्कार किया) — ब्रह्मा हैं। गायत्री छन्दः । 👉 इस मन्त्र का छन्द (छन्दशास्त्र अनुसार लय) — गायत्री है। श्रीशूलिनी देवता । 👉 इस मन्त्र की अधिष्ठात्री देवी — श्री शूलिनी दुर्गा हैं। दुँ बीजं । 👉 “दुँ” यह इस मन्त्र का बीज (मुख्य शक्ति शब्द) है। स्वाहा शक्तिः । 👉 “स्वाहा” इस मन्त्र की शक्ति है। ह्रीँ कीलकं । 👉 “ह्रीँ” इस मन्त्र का कीलक (गुप्त ताला, जो सिद्धि को बाँधता है) है। श्री शूलिनि दुर्गाकटाक्ष सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ 👉 श्री शूलिनी दुर्गा के कृपाकटाक्ष की सिद्धि के लिए इस मन्त्र का जाप किया जाता है। 🌸 ध्यान श्लोक 🌸 संवर्गानलकोटि कोटि विलसत्तेजोमयीं भीषणां । 👉 जो अनन्त अग्निशिखाओं के समान करोड़ों सूर्य-जैसे तेज से दैदीप्य...

श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र

🌸 श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र 🌸 🌺 श्री शूलिनी दुर्गा माला मन्त्र 🌺 ॐ अस्य श्री शूलिनीदुर्गा माला मन्त्रस्य । ब्रह्मा ऋषिः । गायत्री छन्दः । श्रीशूलिनी देवता । दुँ बीजं । स्वाहा शक्तिः । ह्रीँ कीलकं । श्री शूलिनि दुर्गाकटाक्ष सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ 🌸 ध्यान श्लोक 🌸 संवर्गानलकोटि कोटि विलसत्तेजोमयीं भीषणां । वीराभिः परिवारिताभिरभितो वीरैर्ग्रसद्दिक्चयाम् । नानामूर्ति महाप्रयोगनिपुणैर्विड्भिः प्रयुक्ताः पुनः । तानेवाशु विनाशिनीं भयहरीं ध्यायेन्महाशूलिनीम् ॥ हम दिव्य माँ महाशूलिनी दुर्गा के उस उग्र रूप का ध्यान करते हैं जो करोड़ों अग्नियों के समान तेजस्वी हैं। वे वीरों से घिरी हैं, भयंकर और सब भय को हरनेवाली हैं। वे हर नकारात्मक शक्ति को निगल जाती हैं। 🌷 मन्त्र १ 🌷 ॐ नमो भगवति कङ्कालरात्रि दुँ दुर्गे शुँ शूलिनि बँ वटुकभैरवि अर्धरात्र विलासिनि प्रतापकेलिनि महाज्ञानधारिणि सर्वभूतप्रेत पिशाच मद भीषमाकर्षय भीषमाकर्षय आवेशय आवेशय केलय केलय भाषय भाषय महाबटुकभैरवी हुँ फट् स्वाहा ॥ हे भगवती कंकालरात्रि!...
श्रीनीलसरस्वती स्तोत्रम् 🌸 🌸 श्रीनीलसरस्वती स्तोत्रम् 🌸 क्लिक करें प्रत्येक श्लोक पर अर्थ और अनुवाद देखने के लिए। १. घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् भयानक रूप में, महान राक्षस जैसी शक्तिशाली, सभी शत्रुओं का भय दूर करने वाली, भक्तों को वरदान देने वाली देवी, मेरी शरण स्वीकार करो 🌺🙏 अर्थ: हे देवी, मेरी रक्षा करें और मुझे शरण प्रदान करें। 🌸✨ २. सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम् देवताओं और असुरों द्वारा पूजित, सिद्ध और गंधर्वों द्वारा सेवा की जाने वाली, पाप और आलस्य दूर करने वाली देवी, मेरी रक्षा करो 🌷 अर्थ: हे देवी, मुझे पाप और आलस्य से मुक्त करो। 🌼 ३. जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् जटाओं से युक्त, तेज जीभ वाली, बुद्धि जल्दी प्रदान करने वाल...

श्री त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम् – 8 श्लोकों का शब्द-शब्द अनुवाद और सरल हिंदी अर्थ 🌸🪷

    🌸🪷 श्री त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम्  🌸🪷 🌸 श्लोक 1 संस्कृत: कदंबवनचारिणीं मुनिकदम्बकादंविनीं, नितंबजितभूधरां सुरनितंबिनीसेविताम् | नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां, त्रिलोचनकुटुम्बिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥1॥ शब्द-शब्द अनुवाद: कदंबवनचारिणीं – कदंब के जंगल में रहने वाली मुनिकदम्बकादंविनीं – मुनियों की तरह सुंदर नितंबजितभूधरां – जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक सुरनितंबिनीसेविताम् – जिनका पूजन देवता भी करते हैं नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां – नौ महीनों के नवाब जैसी नवीन आँखें और कमल जैसी श्याम त्वचा त्रिलोचनकुटुम्बिनीं – त्रिलोक की माता त्रिपुरसुंदरीमाश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ हिंदी अर्थ: 🌷 मैं उस त्रिपुरसुंदरी देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन में रहती हैं, मुनियों जैसी सुंदर हैं, जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक हैं, देवता जिनका पूजन करते हैं, जिनकी आँखें नवीन और शरीर कमल जैसी श्यामल हैं, और जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड की माता हैं। 🪷 🌸 श्लोक 2 संस्कृत: कदंबवनवासिनीं कनकवल्लकीधारिणीं, महार्हमणिहारिणीं मुखसमुल्लसद्वारुणींम् | दया विभ...
त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम् 🌸🪷 त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम् 🌸🪷 शब्द-शब्द अनुवाद और सहज हिंदी अर्थ के साथ श्लोक 1 कदंबवनचारिणीं मुनिकदम्बकादंविनीं, नितंबजितभूधरां सुरनितंबिनीसेविताम् | नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां, त्रिलोचनकुटुम्बिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥1॥ शब्द-शब्द अनुवाद: कदंबवनचारिणीं – कदंब के जंगल में रहने वाली मुनिकदम्बकादंविनीं – मुनियों जैसी सुंदर नितंबजितभूधरां – जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक सुरनितंबिनीसेविताम् – जिनका पूजन देवता भी करते हैं नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां – नवीन आँखें और कमल जैसी श्याम त्वचा त्रिलोचनकुटुम्बिनीं – त्रिलोक की माता त्रिपुरसुंदरीमाश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ हिंदी अर्थ: मैं उस त्रिपुरसुंदरी देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन में रहती हैं, मुनियों जैसी सुंदर हैं, जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक हैं, देवता जिनका पूजन करते हैं, जि...