Skip to main content
त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् — पूर्ण पूजा विधि

🌺 श्री त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् — सम्पूर्ण शास्त्रीय पूजा-विधि 🌺

❁ ❀ ✿ ❀ ❁

१. पूर्व तैयारी (पूर्वाङ्ग)

✦✦✦
स्थान – पूर्व / उत्तर मुख
आसन – लाल वस्त्र या आसन
समर्पण – “ममोपात्त-समस्त-दुर्मित्क्षयद्वारा…”

सामग्री :
कुंकुम, अक्षत, पुष्प, पंचामृत, घृतदीप, कलश, नैवेद्य, ललिता-यंत्र।

२. पवित्रीकरणम्

“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा…”
जल सिर और शरीर पर छिड़कें — आत्मशुद्धि।

३. आचमनम्

ॐ केशवाय नमः । ॐ नारायणाय नमः । ॐ माधवाय नमः ।

४. संकल्प

“ममोपात्त-सर्व-दुरितक्षयद्वारा श्री त्रिपुरसुन्दरी-अष्टक-पाठेन त्रिपुरसुन्दरी प्रीत्यर्थं करिष्ये।”

५. भू-शुद्धि / आसन-शुद्धि

“ॐ हृं क्लीं अमृतं कुर्व स्वाहा”

६. प्राणायाम विनियोग

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः

पूरक: ॐ ऐं
कुम्भक: ह्रीं श्रीं क्लीं
रेचक: सौः

७. रक्षा-विधानम्

“ॐ अस्त्राय फट्”

८. कलश-स्थापन

“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः”

९. अङ्ग-न्यास

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः हृदये नमः
ॐ सौः शिरसि स्वाहा
ॐ ह्रीं शिखायै वषट्
ॐ श्रीं कवचाय हुं
ॐ क्लीं नेत्रत्रयाय वौषट्
ॐ सौः अस्त्राय फट्

१०. कर-न्यास

अंगुष्ठे — ॐ ऐं
तर्जनी — ह्रीं
मध्यमा — श्रीं
अनामिका — क्लीं
कनिष्ठा — सौः
करतल-कर्ष — “ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः नमः”

११. ध्यानम्

“सिन्दूरारुण-विग्रहां त्रिनयनां… त्रिपुरसुन्दरीं ध्यायेत् ॥”
लाल प्रभा, तीन नेत्र, मधुर मुस्कान — देवी का ध्यान।

१२. आवाहन

“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै आगच्छ आगच्छ…”

१३. षोडशोपचार-पूजन

आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गन्ध, पुष्प, दीप, नैवेद्य, आरती आदि।

१४. 🌸 त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् 🌸

१. कदम्बवनचारिणीं…

कदम्बवनचारिणीं मुनिकदम्बकादम्बिनीम्…

२. कदम्बवनवासिनीं…

कदम्बवनवासिनीं कनकवल्लकीधारिणीं…

३. कदम्बवनशालया…

कदम्बवनशालया कुचभरोल्लसन्मालया…

४. कदम्बवनमध्यगां…

कदम्बवनमध्यगां कनकमण्डलोपस्थिताम्…

५. कुचाञ्चितविपञ्चिकां…

कुचाञ्चितविपञ्चिकां कुटिलकुन्तलालंकृताम्…

६. स्मरप्रथमपुष्पिणीं…

स्मरप्रथमपुष्पिणीं रुधिरबिन्दुनीलाम्बराम्…

७. सकुङ्कुमविलेपनाम्…

सकुङ्कुमविलेपनामलकचुंबिकस्तूरिकाम्…

८. पुरंदरपुरंध्रिकां…

पुरंदरपुरंध्रिकां चिकुरबन्धसैरंध्रिकाम्…

१५. पूर्णाहुति

“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः — त्रिपुरसुन्दर्यै इदं न मम”
अंत में “ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्…”
❁ ❀ ✿ ❀ ❁

🌺 जय माँ त्रिपुरसुन्दरी 🌺

Comments

Popular posts from this blog

Parvati Vallabh Ashtak: Devotional Neelkanth Stava of Lord Shiva

  Lord Shiva in Neelkanth form meditating atop Mount Kailash, inspiring devotion through Parvati Vallabh Ashtak(Representing AI image) 🌸 श्रीमच्छंकरयोगींद्र विरचितं पार्वतीवल्लभाष्टकं नाम नीलकंठ स्तवः 🌸 १. श्लोक नमो भूतनाथं नमो देवदेवं नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्। नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥१॥ शब्द-शब्द अनुवाद: नमो → प्रणाम भूतनाथं → सभी प्राणियों के स्वामी देवदेवं → परम देवता कालकालं → समय और मृत्यु के प्रभु दिव्यतेजम् → दिव्य तेज के स्वामी कामभस्मं → कामासुर नाशक शान्तशीलं → शांत और सदाचारी भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ ✨ सार: शिव के विभिन्न रूपों और गुणों को सम्मानित किया गया है। २. श्लोक सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम्। सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥२॥ शब्द-शब्द अनुवाद: सदा तीर्थसिद्धं → हमेशा तीर्थों में सिद्धि देने वाले सदा भक्तरक्षं → हमेशा भक्तों की रक्षा करने वाले सदा शैवपूज्यं → हमेशा शैवों द्वारा पूज्य सदा शु...

Chaturshashti Bhairava Namavali 🌸 64 Bhairava Forms Explained with Hindi Shlokas & Word-to-Word Meaning

Chaturshashti Bhairava Namavali 🌸: 64 Divine Forms of Lord Bhairava with Hindi Shlokas & Word-to-Word Meaning(Representing AI image) 🌺 चतुःषष्टिभैरवनामावलिः 🌺 १।  असिताङ्गो विशालाक्षो मार्तण्डो मोदकप्रियः । स्वच्छन्दो विघ्नसन्तुष्टः खेचरः सचराचरः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): असिताङ्गः → काला शरीर वाला विशालाक्षः → बड़े नेत्र वाला मार्तण्डः → सूर्य सदृश मोदकप्रियः → मोदक (मिठाई) को प्रिय करने वाला स्वच्छन्दः → स्वतंत्र विघ्नसन्तुष्टः → विघ्नों से संतुष्ट खेचरः → आकाश में विचरने वाला (वायुचर) सचराचरः → चलने-फिरने वाले और स्थिर सभी में विद्यमान व्याख्या 🌸: यह भैरव रूप का वर्णन है, जो सब जगह मौजूद, स्वतंत्र, और हर जीव और पदार्थ में व्याप्त है। २। रुरुश्च क्रोड-दंष्ट्रश्च तथैव च जटाधरः । विश्वरूपो विरूपाक्षो नानारूपधरः परः ॥ अनुवाद (शब्द-शब्द): रुरुः → भयंकर रुद्र क्रोड-दंष्ट्रः → क्रोधी और दंतयुक्त जटाधरः → जटाओं वाला विश्वरूपः → विश्व के स्वरूप वाला विरूपाक्षः → अजीब और भयंकर नेत्र वाला नानारूपधरः → अनेक रूप धारण करने वाला परः → परम व्याख्या 🌸: यह भैर...