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Mahakali Stuti – Powerful Sanskrit Hymn to Goddess Kali

 

🌺 ॥ श्रीमहाकालीस्तुतिः ॥ 🌺
शब्दशः हिन्दी अनुवाद व भावार्थ सहित
(हर श्लोक के साथ अर्थ को पुष्पों-सा सुगंधित रूप में प्रस्तुत किया गया है 🌸)


१.

ॐ नमः कालीकायै।
👉 – परमात्मा का पवित्र नाम
👉 नमः – नमस्कार, वंदन
👉 कालीकायै – देवी काली को

भावार्थ 🌷:
हे माँ काली! आपको शत-शत नमस्कार 🙏।
आप काल की अधिष्ठात्री, भय का नाश करने वाली, परम शक्ति हैं।


जयत्वद्याऽखिलं विश्वं काली कालानुशासिनी।
👉 जयतु – विजयी हो
👉 अद्य – आज
👉 अखिलं विश्वं – समस्त संसार
👉 काली – माँ काली
👉 कालानुशासिनी – समय को नियंत्रित करने वाली

भावार्थ 🌹:
आज सम्पूर्ण जगत पर जय हो उस काली की,
जो स्वयं काल को भी संचालित करती हैं ⏳🌺।


नमामि तां महादेवीं महाकालप्रियां शुभाम्॥ १॥
👉 नमामि – मैं प्रणाम करता हूँ
👉 ताम् – उस देवी को
👉 महादेवीं – महान देवी
👉 महाकालप्रियां – महाकाल (शिव) की प्रिय
👉 शुभाम् – शुभ देने वाली

भावार्थ 🌼:
मैं उस महान, कल्याणकारी, महाकाल की प्रिया देवी को प्रणाम करता हूँ 🙏।
जो समस्त विश्व में मंगल ही मंगल करती हैं 🌺।


२.

खड्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं कपालं च वरप्रदाम्।
👉 खड्गं – तलवार
👉 त्रिशूलं – त्रिशूल
👉 खट्वाङ्गं – दण्ड/अस्त्र
👉 कपालं च – खोपड़ी भी
👉 वरप्रदाम् – वर देने वाली

भावार्थ 🌸:
माँ के हाथों में खड्ग, त्रिशूल, खट्वांग और कपाल हैं 💀।
वो भक्तों को वरदान देने वाली, अभय प्रदायिनी हैं 🌷।


सिंहारूढां महाभीमां महाकाल्यै नमोऽस्तु ते॥ २॥
👉 सिंहारूढाम् – सिंह पर आरूढ़
👉 महाभीमाम् – अत्यंत भयंकर रूप वाली
👉 महाकाल्यै – महाकाली देवी को
👉 नमोऽस्तु ते – आपको नमस्कार हो

भावार्थ 🌹:
हे सिंहवाहिनी, भयंकर रूप धारण करने वाली महाकाली!
आपको कोटि-कोटि प्रणाम 🙏🔥।


३.

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
👉 या देवी – वह देवी
👉 सर्वभूतेषु – सब प्राणियों में
👉 शक्तिरूपेण – शक्ति के रूप में
👉 संस्थिता – स्थित हैं

भावार्थ 🌺:
वह देवी जो सबके भीतर शक्ति बनकर विराजमान हैं,
सर्वत्र उपस्थित हैं, उसी माँ को नमस्कार 🌼।


नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ ३॥
👉 नमः तस्यै – उन्हें नमस्कार
👉 नमो नमः – बार-बार नमस्कार

भावार्थ 🌹:
उन्हीं माँ को बारंबार नमस्कार, बारंबार वंदन 🙏🌸।


४.

स्मरन्ति ये त्वां भक्त्या नित्यं काले काले च मां हिते।
👉 स्मरन्ति ये – जो स्मरण करते हैं
👉 त्वां – आपको
👉 भक्त्या – भक्ति भाव से
👉 नित्यं – प्रतिदिन
👉 काले काले – हर समय
👉 मां हिते – मेरे कल्याण के लिए

भावार्थ 🌼:
जो भक्त नित्य, हर क्षण, प्रेम और भक्ति से आपका स्मरण करते हैं,
उनका कल्याण स्वयं माँ करती हैं 🌸।


न तेषां दुर्लभं किञ्चिदिह लोके परत्र च॥ ४॥
👉 न तेषां – उन भक्तों के लिए नहीं
👉 दुर्लभं किञ्चित् – कुछ भी दुर्लभ नहीं
👉 इह लोके – इस लोक में
👉 परत्र च – और परलोक में भी

भावार्थ 🌺:
जो माँ को भजते हैं, उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं।
इस लोक में भी सुख, और परलोक में भी मोक्ष प्राप्त होता है 🙏।


५.

त्वमेव सर्वदा मातः सर्वेषां जीवनाश्रया।
👉 त्वमेव – आप ही
👉 सर्वदा – सदा
👉 मातः – हे माता
👉 सर्वेषां – सबका
👉 जीवनाश्रया – जीवन का आधार

भावार्थ 🌸:
हे माँ! आप ही सबके जीवन की आधार हैं,
आप ही हमारी पालनकर्ता और रक्षक हैं 🌺।


त्वया विना हि संसारः न सिद्ध्यति कथञ्चन॥ ५॥
👉 त्वया विना – आपके बिना
👉 हि – वास्तव में
👉 संसारः – संसार
👉 न सिद्ध्यति – पूर्ण नहीं होता
👉 कथञ्चन – किसी भी प्रकार

भावार्थ 🌹:
आपके बिना यह संसार अस्तित्व में नहीं रह सकता 🌷।
आप ही सृजन, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं 🌸।


६.

कृष्णवर्णां महाभीमां स्मरेत्कालविलासिनीम्।
👉 कृष्णवर्णाम् – श्यामवर्णा
👉 महाभीमाम् – अत्यंत भयंकर
👉 स्मरेत् – स्मरण करे
👉 कालविलासिनीम् – काल के साथ क्रीड़ा करने वाली

भावार्थ 🌺:
जो श्यामवर्णा, काल के संग खेलने वाली, महाभीमा काली का स्मरण करता है,
उसका भय नष्ट होता है 🌷।


संसारभयभीतः स्यात् लभते मोक्षमुत्तमम्॥ ६॥
👉 संसारभयभीतः – संसार के भय से पीड़ित
👉 स्यात् – वह होता है
👉 लभते – प्राप्त करता है
👉 मोक्षं उत्तमम् – श्रेष्ठ मोक्ष

भावार्थ 🌸:
जो संसार के भय से त्रस्त होकर काली का ध्यान करता है,
वह परम मोक्ष को प्राप्त करता है 🌼।


७.

नमोऽस्तु ते देवि महाकरालि दुर्गे परे कालमाते नमस्ते।
👉 नमोऽस्तु ते – आपको नमस्कार
👉 देवि महाकरालि – हे भयंकर रूप वाली देवी
👉 दुर्गे – दुर्गे
👉 परे – परम
👉 कालमाते – काल की जननी

भावार्थ 🌹:
हे महाकराल रूपिणी दुर्गा! हे काल की माता!
आपको शत-शत प्रणाम 🙏🔥।


शरण्ये भक्तजनवेद्यरूपे प्रसन्नभावेन भजामि कालीम्॥ ७॥
👉 शरण्ये – शरण देने वाली
👉 भक्तजनवेद्यरूपे – जो केवल भक्तों द्वारा जानी जाती हैं
👉 प्रसन्नभावेन – प्रसन्न भाव से
👉 भजामि कालीम् – मैं काली का भजन करता हूँ

भावार्थ 🌸:
हे शरण देने वाली माँ काली!
मैं प्रसन्न भाव से आपका भजन करता हूँ 🌷।
आप भक्तों को सुख, शांति और ज्ञान प्रदान करती हैं 🌺।


॥ फलश्रुतिः ॥ (पाठ का फल)

महाकालीस्तुतिं दिव्यां यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः।
👉 जो इस दिव्य स्तुति को श्रद्धा से पढ़ता है 🌸

भयाद्विमुच्यते सद्यः मृत्युव्याधिभयं तथा॥
👉 वह व्यक्ति तत्काल भय, मृत्यु और रोगों से मुक्त हो जाता है 🌺

राज्यं लभेत् विजयं च सर्वसंपद् अवाप्नुयात्॥
👉 वह राज्य, विजय और समस्त संपत्तियाँ प्राप्त करता है 🌸

भावार्थ 🌼:
जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से माँ महाकाली की इस स्तुति का पाठ करता है,
वह भय, रोग और मृत्यु से मुक्त होकर सुख, विजय और ऐश्वर्य प्राप्त करता है।
माँ काली उस पर अपनी करुणा बरसाती हैं 🌺🌺🌺।



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