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श्री यमुनाष्टकम् - आदि शंकराचार्य

🌸 श्री यमुनाष्टकम् 🌸

आदि शंकराचार्य कृतम्

श्लोक १

मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी ।
तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी ॥
मनोऽनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥१॥

अर्थ:

हे यमुनाजी! आप श्रीकृष्ण की श्याम देह की शोभा हैं, तीनों लोकों के दुःखों को हरनेवाली हैं। आपके तट के कुंज मन को प्रसन्न करते हैं। हे कलिन्दनन्दिनी! सदा मेरे मन का मल धो दीजिए। 🌼

श्लोक २

मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता ।
भृशं प्रपातकप्रवञ्चनातिपण्डितानिशम् ।
सुनन्दनन्दनाङ्गसङ्गरागरञ्जिता हिता ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥२॥

आपका जल अमृत समान है, श्रीकृष्ण के अंगराग से रँगा हुआ, पाप हरनेवाला और कल्याणकारी है। माँ, मेरे मन का कलुष धो डालिए। 🌷

श्लोक ३

लसत्तरङ्गसङ्गधूतभूतजातपातका ।
नवीनमाधुरीधुरीणभक्तिजातचातका ।
तटान्तवासदासहंससंसृता हि कामदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥३॥

आपकी लहरें जन्म-जन्म के पाप धो डालती हैं, भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। माँ, मेरे मन का मल मिटाइए। 🌸

श्लोक ४

विहाररासखेदभेदधीरतीरमारुता ।
गता गिरामगोचरे यदीयनीरचारुता ।
प्रवाहसाहचर्यपूतमेदिनीनदीनदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥४॥

आपके तट की मंद समीर रासविहार की थकान हरती है, आपकी सुंदरता वाणी से परे है। माँ, मेरे मन का कलुष दूर करें। 🌼

श्लोक ५

तरङ्गसङ्गसैकताञ्चितान्तरा सदासिता ।
शरन्निशाकरांशुमञ्जुमञ्जरीसभाजिता ।
भवार्चनाय चारुणाम्बुनाधुना विशारदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥५॥

शरद पूर्णिमा की चाँदनी से शोभित यमुनाजी! आप संसार के लिए अमृत हैं। कृपा कर मन का मल धो डालिए। 🌷

श्लोक ६

जलान्तकेलिकारिचारुराधिकाङ्गरागिणी ।
स्वभर्तुरन्यदुर्लभाङ्गसङ्गतांशभागिनी ।
स्वदत्तसुप्तसप्तसिन्धुभेदनातिकोविदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥६॥

आप श्रीकृष्ण-राधा की जलक्रीड़ा की साक्षी हैं, राधा के अंगराग से सुशोभित हैं। आपका जल सातों सागरों को पवित्र करता है। 🌺

श्लोक ७

जलच्युताच्युताङ्गरागलम्पटालिशालिनी ।
विलोलराधिकाकचान्तचम्पकालिमालिनी ।
सदावगाहनावतीर्णभर्तृभृत्यनारदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥७॥

आप श्रीकृष्ण के अंगराग से सुगंधित हैं, राधाजी के केशों की छाया से शोभित हैं। जो आपके जल में स्नान करते हैं, वे सब पवित्र हो जाते हैं। 🌸

श्लोक ८

सदैव नन्दनन्दकेलिशालिकुञ्जमञ्जुला ।
तटोत्थफुल्लमल्लिकाकदम्बरेणुसूज्ज्वला ।
जलावगाहिनां नृणां भवाब्धिसिन्धुपारदा ।
धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥८॥

आप श्रीकृष्ण की लीला-कुंजों में शोभायमान हैं, कदंब और मल्लिका के फूलों से सुवासित हैं। आपका स्नान भक्तों को संसार-सागर से पार कर देता है। 🌼

🌺 समाप्ति: "जो भक्त श्रद्धा से यमुनाष्टक का पाठ करता है, वह मन, कर्म और वचन से निर्मल हो जाता है।" 🌸

#Yamunashtakam #AdiShankaracharya #Bhakti #Sanskrit #HinduStotra

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