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श्री त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम् – 8 श्लोकों का शब्द-शब्द अनुवाद और सरल हिंदी अर्थ 🌸🪷

 

 🌸🪷श्री त्रिपुरसुंदरी स्तोत्रम् 🌸🪷


🌸 श्लोक 1

संस्कृत:
कदंबवनचारिणीं मुनिकदम्बकादंविनीं,
नितंबजितभूधरां सुरनितंबिनीसेविताम् |
नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां,
त्रिलोचनकुटुम्बिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥1॥

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • कदंबवनचारिणीं – कदंब के जंगल में रहने वाली
  • मुनिकदम्बकादंविनीं – मुनियों की तरह सुंदर
  • नितंबजितभूधरां – जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक
  • सुरनितंबिनीसेविताम् – जिनका पूजन देवता भी करते हैं
  • नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां – नौ महीनों के नवाब जैसी नवीन आँखें और कमल जैसी श्याम त्वचा
  • त्रिलोचनकुटुम्बिनीं – त्रिलोक की माता
  • त्रिपुरसुंदरीमाश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ

हिंदी अर्थ:
🌷 मैं उस त्रिपुरसुंदरी देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन में रहती हैं, मुनियों जैसी सुंदर हैं, जिनके नितंब धरती जितने आकर्षक हैं, देवता जिनका पूजन करते हैं, जिनकी आँखें नवीन और शरीर कमल जैसी श्यामल हैं, और जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड की माता हैं। 🪷


🌸 श्लोक 2

संस्कृत:
कदंबवनवासिनीं कनकवल्लकीधारिणीं,
महार्हमणिहारिणीं मुखसमुल्लसद्वारुणींम् |
दया विभव कारिणी विशद लोचनी चारिणी,
त्रिलोचन कुटुम्बिनी त्रिपुरसुंदरी माश्रये ॥2॥

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • कदंबवनवासिनीं – कदंबवन में रहने वाली
  • कनकवल्लकीधारिणीं – सोने की बेल जैसी आभूषणधारी
  • महार्हमणिहारिणीं – अनेकों रत्नों से सुशोभित
  • मुखसमुल्लसद्वारुणीं – लाल और सुंदर मुख वाली
  • दया विभव कारिणी – दया और शक्ति की अधिकारी
  • विशद लोचनी चारिणी – निर्मल दृष्टि वाली
  • त्रिलोचन कुटुम्बिनी – त्रिलोक की माता
  • त्रिपुरसुंदरी माश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ

हिंदी अर्थ:
🌸 मैं उस देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन में रहती हैं, सोने जैसी आभूषणधारी, अनेक रत्नों से सुशोभित, लाल मुख वाली, दया और शक्ति की देवी हैं, और जिनकी दृष्टि निर्मल है। 🪷


🌸 श्लोक 3

संस्कृत:
कदंबवनशालया कुचभरोल्लसन्मालया,
कुचोपमितशैलया गुरुकृपालसद्वेलया |
मदारुणकपोलया मधुरगीतवाचालया ,
कयापि घननीलया कवचिता वयं लीलया ॥3|

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • कदंबवनशालया – कदंबवन के महल जैसी
  • कुचभरोल्लसन्मालया – कंठ के फूलों जैसी माला पहने वाली
  • कुचोपमितशैलया – कुच के समान सुंदर शरीर वाली
  • गुरुकृपालसद्वेलया – गुरु की कृपा से सुशोभित
  • मदारुणकपोलया – गुलाबी गालों वाली
  • मधुरगीतवाचालया – मधुर गीतों की वाणी वाली
  • कयापि घननीलया – काला और नीला वस्त्र धारण करने वाली
  • कवचिता वयं लीलया – लीलाओं में ढकी हुई

हिंदी अर्थ:
🌺 मैं उस त्रिपुरसुंदरी देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन के महलों जैसी हैं, गाल गुलाबी, मधुर वाणी वाली, सुंदर शरीर धारी और लीलाओं में लिप्त हैं। 🪷


🌸 श्लोक 4

संस्कृत:
कदंबवनमध्यगां कनकमंडलोपस्थितां,
षडंबरुहवासिनीं सततसिद्धसौदामिनीम् |
विडंवितजपारुचिं विकचचंद्रचूडामणिं ,
त्रिलोचनकुटुंबिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥4॥

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • कदंबवनमध्यगां – कदंबवन के मध्य में स्थित
  • कनकमंडलोपस्थितां – सोने के मंडल में विराजमान
  • षडंबरुहवासिनीं – जिनके छह अंग सुशोभित हैं
  • सततसिद्धसौदामिनीम् – जो हमेशा सिद्धि और सौभाग्य की दाता हैं
  • विडंवितजपारुचिं – जप की श्रेष्ठता को विभूत करती हैं
  • विकचचंद्रचूडामणिं – जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है
  • त्रिलोचनकुटुंबिनीं – त्रिलोक की माता
  • त्रिपुरसुंदरीमाश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ

हिंदी अर्थ:
🌸 मैं उस देवी की शरण में जाता हूँ, जो कदंबवन के मध्य विराजमान हैं, सोने के मंडल जैसी सुशोभित, हमेशा सिद्धि और सौभाग्य देने वाली, और जिनके मस्तक पर चंद्रमा चमकता है। 🪷


🌸 श्लोक 5

संस्कृत:
कुचांचितविपंचिकां कुटिलकुंतलालंकृतां ,
कुशेशयनिवासिनीं कुटिलचित्तविद्वेषिणीम् |
मदारुणविलोचनां मनसिजारिसंमोहिनीं ,
मतंगमुनिकन्यकां मधुरभाषिणीमाश्रये ॥5|

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • कुचांचितविपंचिकां – जिनके कंठ में सुंदर कुच-कुच बाल लटके हैं
  • कुटिलकुंतलालंकृतां – सुंदर घुमावदार केश सज्जित
  • कुशेशयनिवासिनीं – जो कुश का आसन प्रिय करती हैं
  • कुटिलचित्तविद्वेषिणीम् – दुःख और वैर का नाश करने वाली
  • मदारुणविलोचनां – गुलाबी आँखों वाली
  • मनसिजारिसंमोहिनीं – कमल जैसी मनोहर और मोहिनी
  • मतंगमुनिकन्यकां – मुनियों और मतंग (हाथी) सहित
  • मधुरभाषिणी – मधुर वाणी वाली

हिंदी अर्थ:
🌺 मैं उस त्रिपुरसुंदरी देवी की शरण में जाता हूँ, जिनके बाल लटके हुए हैं, केश सुंदर घुमावदार हैं, कुश का आसन प्रिय है, दुःख नाश करती हैं, गुलाबी आँखें और मधुर वाणी हैं। 🪷


🌸 श्लोक 6

संस्कृत:
स्मरेत्प्रथमपुष्प्णीं रुधिरबिन्दुनीलांबरां,
गृहीतमधुपत्रिकां मधुविघूर्णनेत्रांचलाम्‌ |
घनस्तनभरोन्नतां गलितचूलिकां श्यामलां,
त्रिलोचनकुटंबिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥6॥

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • स्मरेत्प्रथमपुष्प्णीं – प्रथम पुष्प का स्मरण करने वाली
  • रुधिरबिन्दुनीलांबरां – रक्तबिंदु जैसी नीली वस्त्रधारी
  • गृहीतमधुपत्रिकां – हाथ में मधु की पत्रिका धारण करने वाली
  • मधुविघूर्णनेत्रांचलाम्‌ – आँखों में मधु के जैसी कोमलता
  • घनस्तनभरोन्नतां – ऊँचा और पूर्ण तन धारी
  • गलितचूलिकां श्यामलां – बालों में गली माला, श्याम वस्त्र धारी
  • त्रिलोचनकुटंबिनीं – त्रिलोक की माता
  • त्रिपुरसुंदरीमाश्रये – मैं त्रिपुरसुंदरी में शरण लेता हूँ

हिंदी अर्थ:
🌷 मैं उस देवी की शरण में जाता हूँ, जो प्रथम पुष्प की तरह स्मरणीय हैं, नीली वस्त्रधारी, मधु का पत्र धारण करने वाली, कोमल आँखों वाली, ऊँचे और पूर्ण तन वाली और श्याम वस्त्र धारी हैं। 🪷


🌸 श्लोक 7

संस्कृत:
सकुंकुमविलेपनामलकचुंबिकस्तूरिकां ,
समंदहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् |
असेष जनमोहिनी मरूण माल्य भुषाम्बरा,
जपाकुशुम भाशुरां जपविधौ स्मराम्यम्बिकाम ॥7|

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • सकुंकुमविलेपनामलकचुंबिकस्तूरिकां – कुमकुम और मणियों से सुसज्जित तूरिका वाली
  • समंदहसितेक्षणां – तेजस्वी दृष्टि वाली
  • सशरचापपाशांकुशाम् – धनुष, बाण, चाप और पाश धारण करने वाली
  • असेष जनमोहिनी – असीम मोहिनी, सबको आकर्षित करने वाली
  • मरूण माल्य भुषाम्बरा – लाल माला और आभूषणधारी
  • जपाकुशुम भाशुरां – जप के समय कुशुम और भासुर धारण करने वाली
  • जपविधौ स्मराम्यम्बिकाम – मैं जप करते समय उस अम्बिका का स्मरण करता हूँ

हिंदी अर्थ:
🌺 मैं उस अम्बिका का स्मरण करता हूँ, जो कुंकुम और रत्नों से सुशोभित तूरिका धारण करती हैं, तेजस्वी दृष्टि वाली, धनुष-बाण और पाश धारण करने वाली, असीम मोहिनी हैं और लाल माला-आभूषण से सुशोभित हैं। 🪷


🌸 श्लोक 8

संस्कृत:
पुरम्दरपुरंध्रिकां चिकुरबंधसैरंध्रिकां ,
पितामहपतिव्रतां पटुपटीरचर्चारताम्‌ |
मुकुंदरमणीं मणिलसदलंक्रियाकारिणीं,
भजामि भुवनांबिकां सुरवधूटिकाचेटिकाम ॥8

शब्द-शब्द अनुवाद:

  • पुरम्दरपुरंध्रिकां – नगर और पर्वत के आराध्य
  • चिकुरबंधसैरंध्रिकां – चिकुर (फूल) से सुशोभित
  • पितामहपतिव्रतां – पितामह की तरह धर्म और संतान की रक्षा करने वाली
  • पटुपटीरचर्चारताम्‌ – सुंदर वस्त्र और आभूषणधारी
  • मुकुंदरमणीं – मुकुंद (विष्णु) की सुशोभित पत्नी
  • मणिलसदलंक्रियाकारिणीं – आभूषणों से सुशोभित
  • भुवनांबिकां – सम्पूर्ण जगत की माता
  • सुरवधूटिकाचेटिकाम – देवताओं की भी प्रिय और शोभायुक्त

हिंदी अर्थ:
🌷 मैं उस भुवनमाता देवी की भक्ति करता हूँ, जो नगर और पर्वतों में प्रतिष्ठित हैं, फूलों और आभूषणों से सुशोभित, धर्म और संतान की रक्षा करने वाली, मुकुंद की प्रिय पत्नी, सम्पूर्ण जगत की माता और देवताओं की प्रिय हैं। 🪷



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