🌸 श्रीमंगलागौरी स्तोत्र 🌸
रविरूवाच
सूर्य देव कहते हैं, हे भव्य देवी, आपकी महिमा अपरम्पार है।
देवि त्वदीयचरणाम्बुजरेणुगौरीं भालस्थल वहति प्रणतिप्रवीणः
हे देवी, जो भक्त आपके चरणों के कण को अपने माथे पर रखते हैं, वे आपके प्रति पूर्ण निष्ठा में हैं।
जन्मान्तरेऽपि रजनीकरचारुलेखा तां गौरयत्यतितरां किल तस्य पुंसः
जन्म-जन्मांतर में भी, जो पुरुष रात के अंधकार में आपकी सुंदर रेखाओं वाली पूजा करता है, वह अत्यंत पुण्यवान है।
श्रीमङ्गले सकलमङ्गलजन्मभूमे ... हरति पातककूलवृक्षान्
हे मङ्गल गaurि, आप सम्पूर्ण जन्मभूमि में मंगलमय हैं, सभी पाप और दैत्य रूपी बाधाओं को नष्ट करती हैं, सम्पूर्ण संसार की पालनकर्ता हैं और जिनका नाम लिया जाता है, उनके पाप दूर होते हैं।
मातर्भवानि भवती... न परिमुञ्चति तस्य गेहम्
हे माता, जो आपकी शरण में आते हैं, उनके दुख नष्ट होते हैं। आपके नाम का स्मरण करने से जीवन प्रकाशमान और पवित्र होता है। जो प्रतिदिन “मंगलगौरि” का जप करता है, उसका घर और जीवन हमेशा मंगलमय रहता है।
त्वं देवि वेदजननी ... मङ्गलगौरि मात
हे देवी, आप वेदों की जननी और ओम् स्वरूपा हैं। आप यज्ञ, साधना और पूर्वजों की तुष्टि का कारण हैं। हे गौरि, आप काशी की निर्मल देवी और मोक्ष देने वाली माता हैं। आपकी शरण में जीवन सुरक्षित और मंगलमय होता है।
🌺 **सारांश:** यह स्तोत्र देवी पार्वती की महिमा का वर्णन करता है। इसे पढ़ने या जपने से जीवन में प्रकाश, पुण्य, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 🌸
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