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Parvati Vallabh Ashtak: Devotional Neelkanth Stava of Lord Shiva

पार्वतीवल्लभाष्टकं - नीलकण्ठ स्तवः
🌸 पार्वतीवल्लभाष्टकं - नीलकण्ठ स्तवः 🌸

श्लोक 1

नमो भूतनाथं नमो देवदेवं
नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम्।
नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥१॥
🌸 नमो → प्रणाम
🌸 भूतनाथं → सभी प्राणियों के स्वामी
🌸 देवदेवं → परम देवता
🌸 कालकालं → समय और मृत्यु के प्रभु
🌸 दिव्यतेजम् → दिव्य तेज के स्वामी
🌸 कामभस्मं → कामासुर नाशक
🌸 शान्तशीलं → शांत और सदाचारी
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव के विभिन्न रूपों और गुणों को सम्मानित किया गया है।

श्लोक 2

सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं
सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम्।
सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥२॥
🌸 सदा तीर्थसिद्धं → हमेशा तीर्थों में सिद्धि देने वाले
🌸 सदा भक्तरक्षं → हमेशा भक्तों की रक्षा करने वाले
🌸 सदा शैवपूज्यं → हमेशा शैवों द्वारा पूज्य
🌸 सदा शुभ्रभस्मम् → सफेद भस्म धारण करने वाले
🌸 सदा ध्यानयुक्तं → हमेशा ध्यान में लीन
🌸 सदा ज्ञानतल्पं → ज्ञान देने वाले
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव भक्तों के रक्षक और ज्ञानदाता हैं।

श्लोक 3

श्मशाने शयानं महास्थानवासं
शरीरं गजानं सदा चर्मवेष्टम्।
पिशाचादिनाथं पशूनां प्रतिष्ठं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥३॥
🌸 श्मशाने शयानं → श्मशान में निवास करने वाले
🌸 महास्थानवासं → महान स्थान पर स्थित
🌸 शरीरं गजानं → हाथी समान शक्ति वाले
🌸 सदा चर्मवेष्टम् → हमेशा चमड़े का वस्त्र पहनने वाले
🌸 पिशाचादिनाथं → भूत-पिशाचों के स्वामी
🌸 पशूनां प्रतिष्ठं → पशुओं के संरक्षक
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव भूतनाथ हैं, श्मशान और वन्य प्राणियों के रक्षक।

श्लोक 4

फणीनागकण्ठे भुजङ्गाद्यनेकं
गले रुण्डमालं महावीर शूरम्।
कटिव्याघ्रचर्मं चिताभस्मलेपं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥४॥
🌸 फणीनागकण्ठे → नागों वाले गले
🌸 भुजङ्गाद्यनेकं → अनेक सर्प धारण करने वाले
🌸 गले रुण्डमालं → रुण्ड-माला गले में
🌸 महावीर शूरम् → महान वीर और साहसी
🌸 कटिव्याघ्रचर्मं → कमर में व्याघ्रचर्म
🌸 चिताभस्मलेपं → शव भस्म का लेप
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव वीर, साहसी और भस्मधारी हैं।

श्लोक 5

शिरश्शुद्धगङ्गा शिवावामभागं
बृहद्दीर्घकेशं सदा मां त्रिनेत्रम्।
फणीनागकर्णं सदा भालचन्द्रं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥५॥
🌸 शिरश्शुद्धगङ्गा → सिर पर शुद्ध गंगा
🌸 शिवावामभागं → शिव के बाएं भाग पर
🌸 बृहद्दीर्घकेशं → लंबे और घने केश वाले
🌸 सदा मां त्रिनेत्रम् → हमेशा तीन नेत्रों वाले
🌸 फणीनागकर्णं → नाग कान वाले
🌸 सदा भालचन्द्रं → हमेशा चंद्रमा माथे पर
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव का रूप दिव्य और त्रिनेत्रधारी है।

श्लोक 6

करे शूलधारं महाकष्टनाशं
सुरेशं परेशं महेशं जनेशम्।
धनेशस्तुतेशं ध्वजेशं गिरीशं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥६॥
🌸 करे शूलधारं → हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
🌸 महाकष्टनाशं → बड़े दुखों के नाशक
🌸 सुरेशं → देवताओं के स्वामी
🌸 परेशं → पुरुषों के श्रेष्ठ
🌸 महेशं → महादेव
🌸 जनेशम् → मनुष्यों के स्वामी
🌸 धनेशस्तुतेशं → धन के स्वामी
🌸 ध्वजेशं → ध्वज का स्वामी
🌸 गिरीशं → पर्वतों के स्वामी
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव सभी प्राणियों और तत्वों के स्वामी हैं।

श्लोक 7

उदानं सुदासं सुकैलासवासं
धरा निर्धरं संस्थितं ह्यादिदेवम्।
अजं हेमकल्पद्रुमं कल्पसेव्यं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥७॥
🌸 उदानं सुदासं → गुनों से सम्पन्न
🌸 सुकैलासवासं → कैलाश पर निवास करने वाले
🌸 धरा निर्धरं → पृथ्वी के आधार
🌸 संस्थितं ह्यादिदेवम् → आदिदेव के रूप में स्थित
🌸 अजं → जन्मरहित
🌸 हेमकल्पद्रुमं → सोने के कल्पवृक्ष समान
🌸 कल्पसेव्यं → इच्छाओं को पूर्ण करने वाले
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव अनंत, जन्मरहित और सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं।

श्लोक 8

मुनीनां वरेण्यं गुणं रूपवर्णं
द्विजानं पठन्तं शिवं वेदशास्त्रम्।
अहो दीनवत्सं कृपालुं शिवं तं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥८॥
🌸 मुनीनां वरेण्यं → मुनियों में श्रेष्ठ
🌸 गुणं रूपवर्णं → गुण और रूप में उत्तम
🌸 द्विजानं पठन्तं → ब्राह्मणों को पढ़ने योग्य
🌸 शिवं वेदशास्त्रम् → वेद-शास्त्र पढ़ते हुए शिव का भजन
🌸 अहो दीनवत्सं → दीन-हीन का कल्याण करने वाले
🌸 कृपालुं शिवं तं → कृपालु शिव
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव गुणी, दयालु और वेदज्ञ हैं।

श्लोक 9

सदा भावनाथं सदा सेव्यमानं
सदा भक्तिदेवं सदा पूज्यमानम्।
मया तीर्थवासं सदा सेव्यमेकं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्॥९॥
🌸 सदा भावनाथं → हमेशा भक्तों के स्वामी
🌸 सदा सेव्यमानं → हमेशा पूजा जाने योग्य
🌸 सदा भक्तिदेवं → भक्तों का देवता
🌸 सदा पूज्यमानम् → हमेशा पूज्य
🌸 मया तीर्थवासं → मेरी भक्ति में निवास करने वाले
🌸 सदा सेव्यमेकं → केवल एक ही हमेशा सेवा योग्य
🌸 भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् → मैं पार्वती के प्रिय नीलकण्ठ का भजन करता हूँ
✨ सार: शिव केवल एक ही हैं, हमेशा भक्तों के लिए उपलब्ध और पूज्य।
🌸 इति श्रीमच्छंकरयोगींद्र विरचितं पार्वतीवल्लभाष्टकं नाम नीलकंठ स्तवः 🌸
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